अरुण जेटली का जीवन परिचय

667 total views, 1 views today

नहीं रहे अरुण जेटली, विलक्षण उपलब्धियों से भरा था राजनीतिक जीवन

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन आज एम्स में हो गया। दिल्ली यूनिवर्सिटी से छात्र राजनीति शुरू करनेवाले जेटली का राजनीतिक सफर उपलब्धियों की बेजोड़ कहानी रही। जितनी सफर पारी बतौर वकील जेटली की रही, उतना ही चमकदार सफर एक राजनेता के तौर पर भी रहा।

पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा नेता अरुण जेटली का 66 वर्ष की उम्र में निधन
  • अरुण जेटली के राजनीतिक करियर की शुरुआत दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र नेता के तौर पर हुई
  • पूर्व वित्त मंत्री देश के सबसे चर्चित वकील भी रहे, कई बड़े केस उन्होंने लड़े
  • राज्यसभा में नेता सदन रहने से पहले यूपीए 2 में जेटली ने नेता विपक्ष की जिम्मेदारी निभाई
  • पूर्व वित्त मंत्री जेटली को पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में सबसे करीबी साथी के तौर पर गिना जाता था

नई दिल्ली 
बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज एम्स में आखिरी सांस ली। उनका जीवन विलक्षण उपलब्धियों से भरा रहा। राज्यसभा में बतौर नेता विपक्ष जेटली के तार्किक और अचूक तर्क सत्ता पक्ष के लिए अबूझ चुनौती की तरह रहे। बतौर नेता सदन रहते हुए भी उन्होंने उसी तार्किकता से मोदी सरकार को घेरने के विपक्ष के प्रयासों को बेदम करते रहे। छात्र राजनीति से शुरू हुआ जेटली का सफर बीजेपी के अग्रणी नेता बनने से लेकर वित्त मंत्री की कुर्सी तक पहुंचकर खत्म हुआ। जेटली का राजनीतिक सफर एक विजेता योद्धा जैसा है जिसमें उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

से शुरू हुआ था राजनीतिक जीवन 
अरुण जेटली के राजनीतिक जीवन की शुरुआत एबीवीपी से हुई और वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ अध्यक्ष भी चुने गए। 1977 में जेटली छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए और उसी साल उन्हें एबीवीपी का राष्ट्रीय सचिव भी बनाया गया। 1980 में उन्हें बीजेपी के यूथ विंग का प्रभार भी सौंपा गया। कॉलेज के दिनों से जेटली को करीब से जाननेवालों का कहना है कि बतौर छात्र जेटली अपनी भाषण शैली के कारण बेहद लोकप्रिय थे। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रैजुएट और लॉ फैकल्टी से कानून की पढ़ाई करनेवाले जेटली की गिनती प्रतिभाशाली छात्रों के तौर पर होती थी। 

अरुण जेटली की अनदेखी तस्वीरें

  • राजनीतिक जीवन में कुशल वक्ता से लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी दांव पेंच तक पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली के जीवन के कई अनसुने किस्से हैं। उनके बारे में कहा जाता था कि वह बीजेपी कार्यालय दो कोट टांगकर जाते थे- एक वकील का तो दूसरा प्रवक्ता का। वह अक्सर लोधी गार्डन में मॉर्निंग वॉक के लिए जाया करते थे और स्वास्थ्य को लेकर काफी सजग रहते थे। इस साल मोदी सरकार 2.0 के शपथग्रहण समारोह से एक दिन पहले अरुण जेटली ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर निवेदन किया कि वह पिछले 18 महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहते हैं इसलिए उन्हें मंत्रालय में जगह न दें। आगे स्लाइड में देखिए, अरुण जेटली की कुछ अनदेखी तस्वीरें-
  • अरुण जेटली के राजनीतिक जीवन की शुरुआत एबीवीपी से हुई और वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ अध्यक्ष भी चुने गए। 1977 में जेटली छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए और उसी साल उन्हें एबीवीपी का राष्ट्रीय सचिव भी बनाया गया।
  • देश में जब आपातकाल लगाया गया तो जेटली भी जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में शामिल हो गए। युवा जेटली इस दौरान जेल भी गए और वहीं उनकी मुलाकात उस वक्त के वरिष्ठ नेताओं से हुई। जेल से बाहर आने के बाद वह जनता पार्टी में शामिल हो गए।
  • 37 साल की उम्र में अरुण जेटली वीपी सिंह की सरकार में अडिशनल सॉलिसिटर जनरल बनाए गए थे। जनसंघ में शामिल होने के सवाल पर जेटली ने एक बार अंग्रेजी अखबार को बताया था कि जिन्होंने बंटवारे के दर्द को सहा था वह जनसंघ को समर्थन देता था।
  • सुप्रीम कोर्ट के प्रख्यात युवा वकील होने के साथ-साथ बीजेपी में भी उनका कद बढ़ता गया। जेटली के बारे में मशहूर है कि वह एक समय में दिल्ली के अशोक मार्ग स्थित बीजेपी दफ्तर में जो कोट लेकर जाया करते थे। एक प्रवक्ता का और एक वकील का।
  • अरुण जेटली क्रिकेट के काफी शौकीन रहे हैं। यह तस्वीर उनके छात्र जीवन की है जिसमें वह बॉलिंग मोड में दिखाई दे रहे हैं।
  • 1982 में अरुण जेटली का विवाह संगीता जेटली से हुआ। वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गिरधारी लाल डोगरा की बेटी हैं। पिछले साल जब जेटली ने 1 फरवरी को वित्त मंत्री रहते हुए बजट पेश किया था तो संगीता ने उन्हें 10 में से 9 नंबर दिए थे। उन्होंने कहा था कि बजट बनाने में मानवीय चूक भी हो सकती है इसलिए वह एक नंबर कम देंगी।
  • अरुण जेटली स्वास्थ्य को लेकर काफी सजग रहते हैं। वह अक्सर लोधी गार्डन में मॉर्निंग वॉक पर जाया करते थे। उनके लोधी गार्डन में मॉर्निंग वॉक के कई किस्से मशहूर हैं।
  • अरुण जेटली राजनेता व कुशल वकील के साथ-साथ पारिवारिक शख्स भी थे। वह अक्सर अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाते देखे गए थे। कई सार्वजनिक मौकों पर वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ दिखते थे।
  • अरुण जेटली साल 1999 में वाजपेयी सरकार में राज्यमंत्री बनाए गए। हालांकि, एक साल के भीतर ही कैबिनेट में जगह दे दी गई। उन्हें कानून मंत्रालय के साथ ही विनिवेश मंत्रालय का भी जिम्मा सौंपा गया।

आपातकाल के दौरान जेल जा बने राजनीति के चमकदार चेहरे 
देश में जब आपातकाल लगाया गया तो जेटली भी जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में शामिल हो गए। युवा जेटली इस दौरान जेल भी गए और वहीं उनकी मुलाकात उस वक्त के वरिष्ठ नेताओं से हुई। जेल से छूटने के बाद भी उनका जनसंघ से संपर्क बना रहा और 1980 में उन्हें बीजेपी की यूथ विंग का प्रभार दिया गया। बीजेपी उस दौर में अटल-आडवाणी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही थी और इसके साथ ही जेटली का कद भी लगातार बढ़ता चला गया। 
देश के कई सबसे चर्चित केस के वकील रहे जेटली 
अरुण जेटली की गिनती देश के बेहतरीन वकीलों के तौर पर होती है। 80 के दशक में ही जेटली ने सुप्रीम कोर्ट और देश के कई हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण केस लड़े। 1990 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर वकील का दर्जा दिया। वी.पी. सिंह की सरकार में उन्हें अडिशनल सलिसिटर जनरल का पद मिला। बोफोर्स घोटाला जिसमें पूर्व पीएम राजीव गांधी का भी नाम था उन्होंने 1989 में उस केस से संबंधित पेपरवर्क किया था। पेप्सीको बनाम कोका कोला केस में जेटली ने पेप्सी की तरफ से केस लड़ा था। बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अरुण जेटली ने ही सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में अमित शाह के केस और 2002 गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की तरफ से केस लड़ रहे वकीलों का मार्गदर्शन किया था। हालांकि, 2009 में उन्होंने वकालत का पेशा छोड़ दिया। 

अटल सरकार में बने केंद्रीय मंत्री 
अरुण जेटली अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी कई पदों पर रहे। जेटली को पहले आडवाणी के खास लोगों में शुमार किया जाता था। साल 1999 में वाजपेयी सरकार में उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। हालांकि, एक साल के भीतर ही कैबिनेट में जगह दे दी गई। उन्हें कानून मंत्रालय के साथ ही विनिवेश मंत्रालय का भी जिम्मा सौंपा गया। 

2009 में बने राज्यसभा में बीजेपी के नेता 
2009 में अरुण जेटली को राज्यसभा में नेता विपक्ष बनाया गया। राज्यसभा में बतौर नेता विपक्ष जेटली बहुत तैयारी के साथ सरकार को घेरते थे। सदन के अंदर ही नहीं बाहर मीडिया में जेटली का जलवा था और वह अपने इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूपीए की सरकार पर हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ते। 

1952 में दिल्ली में जन्म

  • अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को दिल्ली में हुआ। उनके पिता महाराज किशन जेटली एक वकील थे, उनका परिवार लाहौर से दिल्ली आया था। जेटली के दो बड़ी बहन हैं। उनकी माता रतन प्रभा गृहिणी थीं।
  • सेंट जेवियर से शुरुआती पढ़ाई के बाद जेटली ने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रैजुएशन की। वह कॉलेज में स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष थे और एक अच्छे वक्ता के तौर पर अपनी पहचान बनाई।
  • साल 1974 में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन का चुनाव लड़ा और एबीवीपी के कैंडिडेट के तौर पर जीत दर्ज की। तब यूनिवर्सिटी कैंपसों में कांग्रेस का कब्जा होता था और जेटली की जीत से दिल्ली की छात्र राजनीति में बड़ा बदलाव आया।
  • अरुण जेटली साल 1975 में इमर्जेंसी के दौरान 19 महीने के लिए जेल में रहे थे। उन्होंने अपने ब्लॉग में जानकारी दी थी कि वह 26 जून को गिरफ्तार होने से बच गए थे, लेकिन अगले ही दिन प्रदर्शन करने के चलते उन्हें जेल में जाना पड़ा।
  • 1977 के आम चुनावों में अरुण जेटली ने लोकतांत्रिक युवा मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर कमान संभाली और जनता पार्टी के पक्ष में चुनाव प्रचार किया।
  • अरुण जेटली ने ट्रायल कोर्ट से प्रैक्टिस शुरू की थी और हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में भी केस लड़े। जनवरी 1990 में वह सीनियर एडवोकेट बने और केवल 37 साल की उम्र में ही अरुण जेटली भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बने।
  • साल 1980 में उन्होंने बीजेपी जॉइन की। वह पहले छात्र इकाई एबीवीपी के सदस्य रहे।
  • साल 1982 में जेटली ने संगीता से शादी की। संगीता गिरिधर लाल डोगरा और शकुंतला डोगरा की बेटी हैं।
  • शादी के एक साल बाद उनके घर बेटी सोनाली का जन्म हुआ। सोनाली भी पेशे से वकील हैं। उनका बेटा रोहन जेटली भी वकील है।
  • साल 1991 में जेटली को बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह मिली। वह 1998 में यूएन जनरल असेम्बली में भारतीय दल के सदस्य थे।
  • साल 2009 में वह दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष बने। इसी साल उन्हें बीसीसीआई का उपाध्यक्ष चुना गया।
  • साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वह कैबिनेट मंत्री बने। उन्हें कानून और कंपनी मामलों का मंत्रालय सौंपा गया। साल 2002 में वह बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बने। तब देश में बीजेपी की सरकार थी। 2006 में वह गुजरात से राज्यसभा सदस्य बने।
  • कांग्रेस सरकार में वह सदन में विपक्ष के नेता रहे। इस दौरान वह काफी मुखर रहे और सदन में अपनी पार्टी की बात रखते नजर आए। साल 2012 में वह फिर से गुजरात से राज्यसभा सदस्य चुने गए। उन्होंने 24 अप्रैल 2012 को तीसरी बार राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली।
  • साल 2002 में वह बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बने। तब देश में बीजेपी की सरकार थी। 2006 में वह गुजरात से राज्यसभा सदस्य बने।
  • 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार में उन्होंने वित्त, रक्षा और कॉर्पोरेट मामले जैसे अहम मंत्रालय संभाले। हालांकि वह अमृतसर से चुनाव लड़े लेकिन हार गए।
  • मार्च 2018 में उन्हें यूपी से राज्यसभा सदस्य चुना गया।
  • अरुण जेटली ने 2019 आम चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। बीजेपी की बड़ी जीत के बाद लग रहा था कि वह एक बार फिर कैबिनेट मंत्री बनेंगे लेकिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने खुद को अलग कर लिया था।

मोदी के सबसे करीबी सहयोगी बने जेटली 
बीजेपी की तरफ से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाए जाने के मजबूत समर्थक के तौर पर जेटली उभरे। कहा जाता है कि उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लंबे समय से अच्छे संबंध रहे थे और वह गुजरात से चुनकर राज्यसभा भी पहुंचे थे। मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया तो बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी नाराज भी हुए। जेटली ऐसे मौके पर भी मजबूती के साथ खड़े रहे और प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीबी सहयोगी बन गए। 

2014 में अमृतसर चुनाव हारे, लेकिन सरकार में कद बढ़ा 
2014 में अरुण जेटली ने अपने राजनीतिक करियर में पहली बार लोकसभा का चुनाव अमृतसर से लड़ा। इस चुनाव में उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हरा दिया। इस हार से जेटली के कद पर कोई असर नहीं पड़ा और मोदी कैबिनेट में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। वित्त मंत्री के तौर पर पीएम मोदी ने अरुण जेटली का ही चयन किया और राज्यसभा में भी उन्हें ही नेता सदन बनाया गया। हालांकि, 2017 से ही जेटली लगातार स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे। 2018 में उनकी किडनी का भी ट्रांसप्लांट किया गया और मोदी सरकार की ओर से 2019 में वह अंतरिम बजट पेश नहीं कर सके। उस दौरान वह इलाज के लिए अमेरिका में थे। 

NBT

2019 में मोदी सरकार में नहीं हुए शामिल, सोशल मीडिया पर संभाला मोर्चा 
अरुण जेटली ने 2019 में मोदी सरकार में शामिल नहीं होने का ऐलान ट्विटर पर किया था। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद जेटली सरकार की तरफ से लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे। उन्होंने कई बार विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए लंबे ब्लॉग भी लिखे। 

वकील से राजनेता बने जेटली

वकील से राजनेता बने जेटली

<?php pvc_stats_update( $postid, 1 ); ?> 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *