सीजीएसटी, एसजीएसटी, UGST और IGST क्या हैं?

सीजीएसटी, एसजीएसटी, UGST और IGST क्या हैं?

दोस्तों, GST का परिचय देने वाले लेख में हम बता चुके हैं कि पहले के Tax System में जारी लगभग 20 Taxes को एक ही Tax में मिला दिया गया है। इस अकेले Tax को नाम दिया गया है GST। कहने को भले ही यह अकेला Tax बचा है, लेकिन वास्तव में यह चार अलग-अलग नामों से वसूला जाता है— CGST, SGST, UGST और IGST। ये चारों तरह के GST एक दूसरे से अलग कैसे हैं? इनका अर्थ क्या है? कब कौन से GST का प्रयोग होता है? इनपुट क्रेडिट सिस्टम में कैसे इनका एक दूसरे से Adjustment किया जाता है? इन सारी बातों की जानकारी हमने इस लेख में दी है।

जीएसटी के भेद समझने से पहले इन्हें जानें

Terms To Define Types Of GST Tax

जीएसटी के इन भेदों (Tpyes) को समझने से पहले हमें दो जरूरी शब्द (Terms के बारे में भी जान लेना चाहिए। क्योंकि, CGST, SGST,UTGST और IGST की परिभाषाओं में इन शब्दों का प्रयोग किया जाएगा।

अंतरराज्यीय आपूर्ति (Inter-State Supplies)

राज्यान्तरिक आपूर्ति (Intra-State Supplies)

अंतरराज्यीय और राज्यान्तरिक आपूर्ति

Inter-State vs Intra-State Supplies

किसी सौदे का अंतरराज्यीय आपूर्ति (Inter State Supply) या राज्यान्तरिक आपूर्ति (Intra State Supply) होना बात पर निर्भर करता है कि माल (Goods) या सेवा (Services) की खरीद (Purchase) किस राज्य में हुई और उसे बेचा (Sale) किस राज्य में जाना है। यानी कि सौदा करने वाले कारोबारी अलग-अलग राज्यों के हैं, या एक ही राज्य के।

अंतरराज्यीय आपूर्ति

Inter-State Supply

जब किसी सामान (goods) या सेवा (service) का सौदा दो अलग-अलग राज्यों के कारोबारियों के बीच होता है तो उसे अंतरराज्यीय आपूर्ति (inter-state supply) की श्रेणी में रखा जाता है। जैसे कि, दिल्ली के किसी व्यक्ति या कारोबारी ने उत्तर प्रदेश के किसी व्यक्ति या कारोबारी को माल बेचा या भेजा। इस तरह का सौदा अंतरराज्यीय आपूर्ति (inter-state supply) की श्रेणी में आएगा। GST में कुछ अन्य प्रकार के सौदे भी Inter-State Supply की श्रेणी में रखे गए हैं, वे हैं—

आयात निर्यात (Imports-Exports): भारत के किसी व्यक्ति या कारोबारी की ओर से दूसरे देश (Foreign Country) के किसी व्यक्ति या कारोबारी को बेचा गया माल या सेवा भी Inter-State Supply की श्रेणी में आएगी। इसी प्रकार किसी दूसरे देश के किसी व्यक्ति या कारोबारी से खरीदा गया माल या सेवा भी Inter-State Supply की श्रेणी में आएगी।

सेज क्षेत्रों से हुए सौदे (Deals With SEZ): किसी SEZ developer या SEZ unit को बेचा गया माल या सेवा भी Inter-State Supply की श्रेणी में रखी गई है। SEZ developer or SEZ unit से खरीदारी को भी Inter-State Supply  की श्रेणी में रखा गया है।

Not Covered In Intra-State: अन्य सौदे भी जोकि अंत: राज्यीय आपूर्ति की श्रेणी में नहीं आते, उन्हें भी Inter-State Supply की श्रेणी में रखा गया है।

राज्यान्तरिक आपूर्ति

Intra-State Supply

जब किसी सामान (goods) या सेवा (service) का सौदा एक ही राज्य के दो व्यक्तियों या कारोबारियों के बीच होता है तो उसे राज्यान्तरिक आपूर्ति (inter-state supply) की श्रेणी में रखा जाता है। जैसे कि, दिल्ली के किसी व्यक्ति या कारोबारी ने दिल्ली के ही किसी व्यक्ति या कारोबारी को माल बेचा या भेजा।

नोट: SEZ units or developers से किए गए सौदे (खरीद या बिक्री दोनों) में भले ही खरीदार और बिक्रेता एक ही राज्य के भीतर स्थित हों, उन्हें राज्यान्तरिक आपूर्ति (Inter-State Supply से बाहर माना जाएगा।

जीएसटी के चार भेद

Four Types Of GST

जैसा कि लेख की शुरुआत में हमने बताया कि GST को चार अलग-अलग नामों से वसूला जाता है— CGST, SGST, UGST और IGST। अब हम एक-एक करके चारों को परिभाषित करते हैं—

1. सीजीएसटी या सेंट्रल जीएसटी

CGST or Central GST

इसका फुल फॉर्म है Central Goods and Services Tax। वस्तुओं या सेवाओं की राज्य के भीतर ही आपूर्ति (Intra-state supplies) की स्थिति में यह टैक्स केंद्र सरकार को चुकता किया जाता है। यानी कि अगर किसी राज्य का व्यापारी अपने ही राज्य के दूसरे व्यापारी से कोई खरीद करता है तो  इस सौदे पर उसे भारत सरकार को CGST चुकाना होगा। फिलहाल CGST की दर State GST (SGST)  के बराबर ही है, और उसी के साथ ही इसे वसूला भी जाता है।

2. एसजीएसटी या राज्य जीएसटी

SGST or State GST

इसका फुल फॉर्म है State Goods and Services Tax। एसजीएसटी भी वस्तुओं और सेवाओं के की राज्य के भीतर ही आपूर्ति (intra-state supplies) की स्थिति में लगता है। यानी कि अगर किसी राज्य का व्यापारी अपने ही राज्य के दूसरे व्यापारी से कोई खरीद करता है तो  इस सौदे पर उसे राज्य सरकार को भी SGST भी चुकाना होगा। फिलहाल भारत में SGST की दर भी CGST की दर के बराबर ही है।

3. यूटीजीएसटी या यूजीएसटी

UTGST (or UGST)?

इसका फुल फॉर्म है Union Territory Goods and Services Tax। यह दरअसल, State GST यानी SGST का ही दूसरा नाम है। जो राज्य केंद्र शासित राज्यों की श्रेणी में आते हैं उन्हें Union Territory कहा जाता है। इन राज्यों की ओर से SGST की बजाय UTGST के नाम से वसूला जाता है। SGST की तरह ही UTGST, केंद्र शासित प्रदेशों की सीमा के भीतर होने वाले सौदों पर चुकता करना होता है। CGST के साथ और उसी की बराबर मात्रा में इसका भुगतान करना होता है।

भारत में  कुल 7 union territories हैं

National Capital Territory of Delhi.

Puducherry.

Chandigarh.

Dadra and Nagar Haveli.

Daman and Diu.

Lakshadweep.

Andaman and Nicobar Islands.

Union Territories के लिए अलग से GST की कैटेगरी क्यों?

यहां common State GST (SGST) क्यों नहीं लागू किया जा सकता। क्योंकि Union Territory में बिना किसी विधेयक के common State GST (SGST) नहीं लगाया जा सकता। इनमें से ऊपर की 2 Union Territory Delhi और Puducherry में चूंकि उनकी खुद की विधानसभाएं (legislatures) हैं, इसलिए वहां पर SGST लागू किया जा सकता है। बाद की 5 Union Territories के लिए कोई अलग से विधानसभा नहीं है। इसलिए वहां होने वाले सौदों पर UTGST ही चुकाना होगा।

4. आईजीएसटी या एकीकृत जीएसटी

IGST Or Integrated GST

जब दो अलग-अलग राज्यों के व्यक्तियों या कारोबारियों के बीच कोई सौदा होता है तो इस पर सिर्फ एकीकृत जीएसटी यानी Integrated GST (IGST) लगेगा। यह दरअसल CGST और SGST, दोनों के Total के बराबर का अकेला टैक्स होता है। इसे सिर्फ केंद्र सरकार को चुकाना पडता है। हालांकि, Central Government के पास जमा होने के बाद आखिरकार यह दो बराबर-बराबर भागों में Cetntral और उस State Government को मिल जाता है, जहां उसकी खपत होती है। यानी की IGST की वसूली का अधिकार अकेले केंद्र के पास होता है, जबकि प्राप्ति केंद्र और राज्य दोनों को बराबर-बराबर होती है।

किसी दूसरे देश से माल या सेवा के लेन-देन वाले सौदे भी IGST के दायरे में आते हैं।

SEZ Unit या SEZ Developer से किसी माल या सेवा के लेन-देन भी IGST के दायरे में आते हैं।

igst sgst cgst hindi

सीजीएसटी/ एसजीएसटी और आईजीएसटी का उदाहरण

An Example For CGST/ SGST And IGST

माना अभिषेक इलाहाबाद (UP) का रहने वाला है। उसने कानपुर (UP) में किसी थोक की दुकान से 1 लाख रुपए का माल खरीदा। मान लिया कि इस पर 12% GST लगता है, जोकि होता है 12000 रुपए। अब चूंकि उसका सौदा उत्तर प्रदेश में ही खरीदा जा रहा है और उत्तर प्रदेश में ही बेचा जाना है। तो यह Intra-state Supply की श्रेणी में आता है। तो इस सौदे पर अभिषेक को CGST और SGST दोनों बराबर-बराबर 6-6 हजार रुपए चुकता करने होंगे।

इसी तरह मान लेते हैं कि अभिषेक ने 12 प्रतिशत GST वाला कोई माल  शिमला (Himachal Pradesh) से मंगवाया।अब चूंकि उसका सौदा Inter State Supply में आता है तो उसे इस पर 12000 रुपए इकट्ठा IGST के रूप में चुकाने होंगे।

अलग-अलग तरह के या दोहरे जीएसटी की जरूरत क्यों

Why we are There Different GSTs or Dual GST?

भारत एक संघीय (federal) व्यवस्था वाला देश है। यहां पर केंद्र और राज्य दोनों अलग-अलग स्तर पर शासन के लिए जिम्मेदार हैं। दोनों स्तर पर सरकारों को शासन के लिए धन की जरूरत होती है। इसलिए दोनों को Tax लगाने के अधिकार भी हैं। हालांकि,  कुछ Taxes पर सिर्फ केंद्र सरकार का एकाधिकार है, लेकिन उनमें भी नियमों के मुताबिक राज्यों को हिस्सा मिलता है।

अभी तक वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और उनके व्यापार पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अलग-अलग नाम से कई टैक्स वसूलती रही हैं। अब उन्हीं सारे टैक्सों को GST में मिला दिया गया है। तो फिर GST पर दोनों का अधिकार भी बनता है। इसी लिए राज्य सरकार के लिए CGST और केंद्र सरकार के लिए SGST के रूप में दोहरी जीएसटी कर प्रणाली (Dual GST) निर्धारित की गई।

IGST की रचना इसलिए की गई, ताकि, दो राज्यों के बीच आपसी लेन-देन को लेकर कोई समस्या न खड़ी हो और टैक्सों का न्यायपूर्ण ढंग से वितरण (Distribution) हो जाए। IGST में किसी राज्य का हिस्सा उसे केंद्र के माध्यम से मिल जाएगा।

इनपुट क्रेडिट में कैसे होता है इन टैक्सों का समायोजन

Adjustment Of CGST, SGST/UTGST And IGST

GST में किसी वस्तु या सेवा पर टैक्स का भार अंतिम रूप से उस व्यक्ति पर पडता है, जिसने उसका उपभोग (Consumption) किया हो। लेकिन उस अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के पहले माल जितने स्तरों पर खरीदा गया होता है, सब जगहों पर GST चुकाना होता है। लेकिन ये बीच में चुकाया गया GST आखिरकार उसे वापस मिल जाता है। इसके लिए सरकार ने Input Credit सिस्टम की व्यवस्था जारी की है।

इस व्यवस्था में होता यह है कि  आपके चुकाए गए गए GST के बदले में आपके अकाउंट में Credit  दर्ज होते जाते हैं। बाद में जब आपको अपनी बिक्रियों पर वसूले गए GST को सरकार के पास जमा करना होता है, तो आप अपने Account में जमा Credit को उसमें कटवा देते हैं।

लेकिन, किस तरह के GST को किस तरह के GST को चुकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है, इसके लिए निश्चित नियम हैं। इनकी जानकारी भी हम यहां दे रहे हैं—

इनपुट क्रेडिट कितने प्रकार से मिलते हैं?

जीएसटी सिस्टम में किसी सौदे पर खरीदार को तीन प्रकार के Input Credit मिलते हैं—

SGST Input Credit : एक ही राज्य के दो कारोबारियों के बीच सौदा होने पर राज्य सरकार को चुकाए जाने वाले SGST के बदले में मिलते हैं।

CGST Input Credit:  एक ही राज्य के दो कारोबारियों के बीच सौदा होने पर केंद्र सरकार को चुकाया जाने वाले GST के बदले में मिलते हैं।

IGST Input Credit: दो अलग-अलग राज्यों के कारोबारियों के बीच सौदा होने पर, Purchaser की ओर से चुकाया जाने वाले एकीकृत टैक्स (Integrated)  के बदले में मिलते हैं।

Note: IGST के मामले में Export करने वाला राज्य, SGST के बदले में Credit Central Government को Transfer कर देता है, फिर केंद्र सरकार की ओर से Import करने वाले राज्य को Credit  ट्रांसफर कर दी जाती है।

इनपुट क्रेडिट के भुगतान के नियम

IGST का भुगतान:  IGST के भुगतान के लिए SGST, CSGT और IGST, सभी के बदले में मिले Input Credit क उपयोग किया जा सकता हैं।

CGST का भुगतान: CGST के भुगतान के लिए, CGST और IGST के बदले में मिले Input Credit का उपयोग किया जा सकता है।

SGST का भुगतान: SGST के भुगतान के लिए, SGST और IGST के बदले में मिले  Credit का उपयोग किया जा सकता है।

Note: CGST और SGST के इनपुट क्रेडिट एक दूसरे के Output Tax के भुगतान के लिए उपयोग में नहीं लाए जा सकते। यानी कि CGST के भुगतान के लिए SGST के बदले में मिले Input Credit का उपयोग नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार SGST के भुगतान के लिए CGST के बदले में मिले Input Credit  का उपयोग नहीं किया किया जा सकता।

Leave a Reply