Passport

पासपोर्ट या पारपत्र किसी राष्ट्रीय सरकार द्वारा जारी वह दस्तावेज होता है जो अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के लिए उसके धारक की पहचान और राष्ट्रीयता को प्रमाणित करता है। पहचान स्थापित करने के लिए नाम, जन्म तिथि, लिंग और जन्म स्थान के विवरण इसमे प्रस्तुत किये जाते हैं। आमतौर पर एक व्यक्ति की राष्ट्रीयता और नागरिकता समान होती हैं।

केवल पासपोर्ट रखने भर से धारक किसी दूसरे देश में प्रवेश का या जब धारक किसी दूसरे देश मे हो तो वाणिज्यिदूतीय संरक्षण का अधिकारी नहीं होता। किसी विशेष स्थिति मे जिसके निपटान हेतु यदि कोई विशेष समझौता प्रभाव में ना हो तो उस स्थिति मे पासपोर्ट, धारक को किसी अन्य विशेषाधिकार का पात्र भी नहीं बनाता, हालांकि सामान्यत: यह धारक को विदेश यात्रा के पश्चात पासपोर्ट जारी करने वाले देश मे लौटने की अनुमति देता है। वाणिज्यिदूतीय संरक्षण का अधिकार अंतरराष्ट्रीय समझौतों से जबकि वापस लौटने का अधिकार जारी कर्ता देश के कानून से उत्पन्न होता है। एक पासपोर्ट जारी कर्ता देश में धारक के किसी अधिकार या उसके निवास स्थान का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।

विशेष संबन्ध

कुछ क्षेत्रीय समूह जैसे दक्षिण अफ्रीकी देशों का समूह, यूरोपीय संघ, खाड़ी के देशों का समूह खाड़ी सहयोग परिषद और दक्षिण अमरीकी देशों का समूह मर्कोसर, अपने सदस्य देशों के नागरिकों को केवल पहचान पत्र के आधार पर यात्रा करने की अनुमति देते हैं। 1995 में 26 यूरोपीय देशों ने एक दूसरे के यहां बिना सीमा नियंत्रण के आने-जाने संबंधी समझौता किया था। लेकिन एयरलाइंस कंपनी चाहे तो यात्रियों की पहचान के लिए पासपोर्ट की मांग कर सकती है। मिसाल के तौर पर अमरीकी नागरिक अगर कैरेबियाई देश या बरमूडा जा रहे हैं तो पासपोर्ट की जगह पर केवल पासपोर्ट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या मिलिट्री पहचान पत्र से काम चल सकता है। ब्रिटेन और आयरलैंड के नागरिक भी एक दूसरे के यहां केवल फोटो पहचान पत्र के साथ आ जा सकते हैं। ब्रिटेन की महारानी अकेली ऐसी ब्रितानी हैं जिन्हें पासपोर्ट की कोई ज़रूरत नहीं होती है।[1]

विभिन्न देशों के पारपत्र का रंग इस मानचित्र में दर्शाया गया है।

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